‘जीरो टाइम लैग’ से साइबर ठगों पर होगा प्रहार, 190 बैंक शाखाओं पर AI रखेगी नजर

जयपुर। प्रदेश में बढ़ते साइबर वित्तीय अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने अब ‘जीरो टाइम लैग’ रणनीति अपनाने का निर्णय लिया है। लक्ष्य यह है कि 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही बैंकों की प्रतिक्रिया लगभग तत्काल हो, ताकि ठगी की रकम समय रहते रोकी जा सके। इसी उद्देश्य से मंगलवार को शासन सचिवालय में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की विशेष साइबर समन्वय बैठक आयोजित हुई, जिसमें मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, राजस्थान पुलिस और प्रमुख बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायत मिलने और बैंक द्वारा संबंधित खाते को होल्ड करने के बीच का समय न्यूनतम किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सीमित मामलों में ही त्वरित कार्रवाई से राशि बचाई जा रही है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है। इसी क्रम में बुधवार को सभी प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 कॉल सेंटर का दौरा कर उसकी कार्यप्रणाली और शिकायत निस्तारण प्रक्रिया का अवलोकन करेंगे।

बैठक में साइबर ठगी पर लगाम कसने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्रदेश की 190 चिन्हित हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं और संदिग्ध एटीएम बिंदुओं पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी लागू की जाएगी। वहीं संदिग्ध खातों की केंद्रीकृत मॉनिटरिंग, जिला स्तर पर नियमित समन्वय बैठकें तथा प्रमुख बैंकों के नोडल अधिकारियों की साइबर रिस्पॉन्स सेंटर में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के साइबर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का प्रभावी पालन करते हुए म्यूल अकाउंट्स और संदिग्ध बैंक खातों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और जन-जागरूकता अभियान दोनों को समान प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में यह भी तय किया गया कि बिना पर्याप्त भौतिक सत्यापन के उच्च सीमा वाले चालू खाते खोलने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाएगी। साथ ही संदिग्ध एवं उच्च जोखिम वाले खातों का पुनः सत्यापन किया जाएगा। मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) और ग्रीवांस रिड्रेसल पोर्टल (GRM) के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ितों को राशि लौटाने की प्रक्रिया भी अधिक तेज और सरल बनाई जाएगी।

मुख्य सचिव ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि केवाईसी अपडेट से जुड़े संदेश केवल अधिकृत माध्यमों से ही ग्राहकों तक पहुंचाए जाएं। उन्होंने विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगी से बचाने के लिए बैंक शाखाओं में सहायता काउंटर स्थापित करने तथा उन्हें डिजिटल लेन-देन के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।

राज्य सरकार, राजस्थान पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश में सुरक्षित एवं भरोसेमंद डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी वित्तीय साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर सूचना दें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

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