जयपुर। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए महज 9 महीनों में 80 इनामी तस्करों को गिरफ्तार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एमएन के मार्गदर्शन में संचालित ‘एएनटीएफ का वार : डायमंड जुबली के पार’ अभियान के तहत गिरफ्तार तस्करों पर कुल 21.28 लाख का इनाम घोषित था।
एएनटीएफ के महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि ड्रग सिंडिकेट के अंतरराज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए राजस्थान सहित 8 राज्यों में विशेष अभियान चलाया गया। तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, केरल, झारखंड और पश्चिम बंगाल में छिपे तस्करों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया गया। इनमें 64 आरोपी राजस्थान, 10 मध्य प्रदेश, 2 गुजरात, 2 पंजाब तथा अन्य राज्यों के निवासी शामिल हैं।
कार्रवाई के दौरान एएनटीएफ ने राज्य की ‘टॉप-25’ सूची में शामिल चार बड़े मादक पदार्थ तस्करों को भी गिरफ्तार किया। गिरफ्तार 80 आरोपियों में 65 पर 25 हजार से अधिक, 9 पर 50 हजार से अधिक और 2 पर 1 लाख से अधिक का इनाम घोषित था। वहीं 16 आरोपी ऐसे थे जो 5 से 10 वर्षों से फरार चल रहे थे।
चरवाहा, लाइनमैन और कंपाउंडर बनकर पहुंची पुलिस
फरार तस्करों तक पहुंचने के लिए एएनटीएफ की टीमों ने कई बार छद्म वेश अपनाया। कहीं पुलिसकर्मी चरवाहा बने तो कहीं कंपाउंडर, लाइनमैन, जनगणना कर्मी, मजदूर, ठेकेदार और किरायेदार बनकर आरोपियों के ठिकानों तक पहुंचे। सटीक सूचना मिलने के बाद बिना किसी भनक के तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया।
5 विशेष टीमों ने संभाला मोर्चा
पूरे अभियान में एएनटीएफ की ‘डेल्टा’, ‘विक्टर’, ‘सैमसन’, ‘रूद्रा’ और ‘रैण्डी’ नामक विशेष टीमों ने समन्वित कार्रवाई की। ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इनके सांकेतिक नाम ‘नीलमणि’, ‘विषाणुबाहु’, ‘मदमार्जार’ और ‘खर-दूषण’ रखे गए थे।
अब ‘नार्को-25’ माफियाओं पर फोकस
आईजीपी विकास कुमार ने कहा कि 80 इनामी तस्करों की गिरफ्तारी के बाद अब एएनटीएफ का अगला लक्ष्य ‘नार्को-25’ सूची में शामिल बड़े तस्करों के नेटवर्क और उनकी अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई करना है।
राजस्थान पुलिस ने आमजन से भी नशा तस्करी से जुड़ी जानकारी साझा करने की अपील की है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।






