जयपुर। “जिस दिन देश का हर नागरिक शिक्षित हो जाएगा और नेताओं के पीछे भागना छोड़ देगा, समझिए उसी दिन से देश अपने आप तरक्की की राह पर आगे बढ़ने लगेगा। अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण ही भोले-भाले लोग नेताओं के पीछे चक्कर काटते रहते हैं।” यह कहना है सेना से सेवानिवृत्त एवं डीआरएस स्कूल के संचालक संजय सिंह राघव का। एक विशेष बातचीत में उन्होंने शिक्षा, संस्कार, युवा पीढ़ी और देश के प्रति जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
13 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय
राघव पिछले 13 वर्षों से झोटवाड़ा स्थित जीण माता नगर, हरनाथपुरा में डीआरएस स्कूल का संचालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल का उद्देश्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि शिक्षा के साथ उनमें उच्चकोटि के संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने दिल्ली के वसंत विहार स्थित डीपीएस स्कूल में भी सेवाएं दीं। इसी दौरान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने अपने दिवंगत भाई देवेन्द्र सिंह राघव की स्मृति में डीआरएस स्कूल शुरू करने का निर्णय लिया। राघव बताते हैं कि उनके भाई देवेन्द्र सिंह राघव सेना में सेवाएं देते हुए शहीद हो गए थे। उनके नाम पर स्कूल स्थापित कर बच्चों को शिक्षित करना उनके लिए केवल एक संस्थान चलाना नहीं, बल्कि भाई की स्मृति को समाजसेवा और शिक्षा के माध्यम से जीवित रखने का प्रयास है।
‘शिक्षित होने के बावजूद युवा दिशा को लेकर भ्रमित’
पिछले दिनों में दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में Gen-Z पीढ़ी के प्रदर्शनों को लेकर भी राघव ने अपनी बात रखी। उनका कहना है कि इन प्रदर्शनों में शामिल अधिकांश युवा शिक्षित हैं, लेकिन केवल शिक्षित होना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा के साथ विवेक, जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समझ होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को प्रदर्शन के दौरान सरकार और सेना पर अनर्गल टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक आज की युवा पीढ़ी को सेना और देश की भूमिका को समझने की जरूरत है। राघव का कहना है कि Gen-Z के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शिक्षा और सूचनाओं की उपलब्धता के बावजूद कई युवा यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे कि वे वास्तव में चाहते क्या हैं। उनके अनुसार युवा ऊर्जा को विरोध और टकराव की बजाय सकारात्मक दिशा में लगाना चाहिए।
‘शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, जिम्मेदारी भी सिखाए’
संजय सिंह राघव के मुताबिक शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना या नौकरी पाना नहीं है। शिक्षा व्यक्ति को सही-गलत में अंतर समझने, अपने अधिकारों और कर्तव्यों को जानने तथा देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की क्षमता देती है। उनका मानना है कि यदि स्कूल स्तर से ही बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव दिया जाए तो आने वाली पीढ़ी देश को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।






