भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ड्राफ्ट को स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।
प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों को देखते हुए सरकार ने इस व्यवस्था को कानूनी दायरे में लाने की तैयारी की है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर जेल और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। 19 जुलाई को जगदीशपुर किले में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक के प्रारूप पर अंतिम मुहर लगाई गई। इसके बाद सरकार इसे विधानसभा के मानसून सत्र में सदन के पटल पर रखने की तैयारी कर रही है।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए प्रस्तावित प्रमुख प्रावधान
प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने के एक महीने के भीतर अपना पंजीकरण कराना होगा। दोनों पक्षों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना आवश्यक होगी। साथ ही दोनों पहले से विवाहित नहीं होने चाहिए तथा वे प्रतिबंधित संबंधों की श्रेणी में भी नहीं आते हों।
यदि किसी भी पार्टनर की आयु 21 वर्ष से कम है, तो लिव-इन संबंध की शुरुआत और समाप्ति की सूचना उसके माता-पिता को भेजी जाएगी। वहीं, रजिस्ट्रार द्वारा लिव-इन पार्टनर्स का रिकॉर्ड संबंधित स्थानीय पुलिस थाने के साथ भी साझा किया जाएगा।
ड्राफ्ट में यह भी प्रस्तावित है कि लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान जन्म लेने वाले बच्चों को पूरी तरह वैध माना जाएगा तथा उन्हें उत्तराधिकार सहित सभी वैधानिक अधिकार प्राप्त होंगे।
नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार यदि कोई जोड़ा बिना पंजीकरण के एक महीने से अधिक समय तक साथ रहता है, तो उसे तीन महीने तक की जेल अथवा 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसी प्रकार पंजीकरण के दौरान गलत जानकारी देने पर तीन महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा यदि संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी होने के बाद भी वह अपना बयान दर्ज नहीं कराता है, तो उसे छह महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
महिला पार्टनर को मिलेगा भरण-पोषण का अधिकार
ड्राफ्ट में यह भी व्यवस्था की गई है कि यदि पुरुष साथी महिला पार्टनर को छोड़ देता है, तो महिला अदालत के माध्यम से कानूनी पत्नी की तरह भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) का दावा कर सकेगी। सरकार का उद्देश्य लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पक्षों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को कानूनी संरक्षण प्रदान करना है।






