जयपुर। साइबर वित्तीय ठगी के मामलों में पीड़ितों को त्वरित राहत और अपराधियों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान पुलिस ने बड़ा फैसला लिया है। अब 1 लाख या उससे अधिक की साइबर वित्तीय ठगी की शिकायत मिलते ही ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) स्वतः दर्ज होगी। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने इस संबंध में सभी पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को दिशा-निर्देश जारी कर नई व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। यह निर्णय भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों और बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए लिया गया है, ताकि पीड़ितों को तत्काल कानूनी संरक्षण मिल सके और ठगी की राशि को समय रहते फ्रीज कर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।
5 लाख से घटाकर 1 लाख की गई सीमा
एडीजी साइबर क्राइम वी.के. सिंह ने बताया कि पहले ई-एफआईआर की व्यवस्था केवल 5 लाख या उससे अधिक की साइबर ठगी पर लागू थी। अब यह सीमा घटाकर 1 लाख कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत I4C के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, 1930 हेल्पलाइन और सीसीटीएनएस प्रणाली को एकीकृत किया गया है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित साइबर पुलिस स्टेशन में स्वतः ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो जाएगी।
शिकायत मिलते ही शुरू होगी कार्रवाई
नई व्यवस्था के तहत पुलिस शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर का इंतजार किए बिना बैंक खातों को फ्रीज कराने, संदिग्ध राशि होल्ड कराने, सीडीआर, आईपीडीआर, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाने जैसी कानूनी कार्रवाई तुरंत शुरू करेगी। हालांकि शिकायतकर्ता को 72 घंटे के भीतर संबंधित थाने पहुंचकर एफआईआर की मुद्रित प्रति पर हस्ताक्षर करने होंगे।
राशि के आधार पर होगा अनुसंधान
नई व्यवस्था के अनुसार 1 करोड़ या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की जांच राज्य स्तरीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर करेगा। वहीं 1 लाख से 1 करोड़ तक के मामलों का अनुसंधान जिला साइबर पुलिस स्टेशन या स्थानीय थाना करेगा।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि यह व्यवस्था राजस्थान पुलिस की तकनीक आधारित, त्वरित और पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग को और मजबूत करेगी तथा साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।






