कोटा। साइबर अपराध के लगातार बदलते तरीकों के बीच राजस्थान पुलिस ने अपनी जांच और अपराध नियंत्रण व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। AI, साइबर सुरक्षा और OSINT जैसी तकनीकों की मदद से पुलिस अब डिजिटल अपराधियों के खिलाफ ज्यादा वैज्ञानिक और प्रभावी तरीके से मोर्चा संभालने की तैयारी में है। इसी कड़ी में कोटा में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 75 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
कोटा शहर पुलिस एवं भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) कोटा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रेंज स्तरीय ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर सुरक्षा आधारित स्मार्ट पुलिसिंग’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को समापन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन कोटा रेंज आईजी हरेन्द्र महावर के मार्गदर्शन एवं कोटा शहर एसपी तेजस्वनी गौतम की पहल पर किया गया।
75 पुलिसकर्मियों को मिले प्रमाण-पत्र
17 से 19 अगस्त तक चले प्रशिक्षण के समापन समारोह में मुख्य अतिथि एडीजी वी.के. सिंह ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले कोटा शहर एवं कोटा रेंज के 75 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बदलते डिजिटल दौर में पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़ना अब आवश्यकता बन चुका है। AI, साइबर सुरक्षा और OSINT का व्यावहारिक प्रशिक्षण पुलिस की जांच क्षमता और अपराध नियंत्रण को नई मजबूती दे सकता है।
डिजिटल सबूतों से लेकर AI टूल्स तक
प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग, AI आधारित तकनीकी टूल्स और OSINT के जरिए डिजिटल सूचनाओं के विश्लेषण सहित विभिन्न आधुनिक तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को केवल तकनीक की जानकारी देना नहीं, बल्कि उसे वास्तविक पुलिस जांच और अपराध नियंत्रण में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना रहा।
17 अगस्त को हुआ था शुभारंभ
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ 17 अगस्त को पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने किया था। प्रशिक्षण के दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को डिजिटल अपराधों की बदलती प्रकृति और उनसे निपटने में आधुनिक तकनीक की भूमिका से अवगत कराया गया।
पुलिस और IIIT की साझेदारी बनी ताकत
कार्यक्रम के सफल आयोजन में IIIT कोटा के कोर्स समन्वयक प्रोफेसर ज्ञान सिंह एवं उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस और तकनीकी-शैक्षणिक संस्थान के इस सहयोग से पुलिसकर्मियों को अत्याधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिला। राजस्थान पुलिस के लिए यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब साइबर अपराध पारंपरिक अपराधों की तुलना में लगातार नए और जटिल रूप ले रहे हैं। तकनीकी दक्ष पुलिस, डेटा आधारित जांच और AI का इस्तेमाल आने वाले समय में स्मार्ट पुलिसिंग की अहम कड़ी साबित हो सकता है।






