विदेश की धरती से पिता की याद में गांव के होनहारों को सम्मान, मेधावी बच्चों के सपनों को मिली उड़ान

चूरू। पिता की स्मृति को केवल तस्वीरों और श्रद्धांजलि तक सीमित रखने के बजाय उसे नई पीढ़ी के भविष्य से जोड़ने की एक प्रेरक पहल चूरू जिले के साण्डन गांव में देखने को मिली। आयरलैंड निवासी देवीसिंह जी बीदावत ने अपने स्वर्गीय पिता प्रेम सिंह बीदावत की स्मृति में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय साण्डन में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित कर मेधावी विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाली प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हौसला देना रहा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह परंपरा जारी रखते हुए विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
समारोह में बीदावत परिवार के सतपाल सिंह, यशपाल सिंह, उनकी पत्नी कोमल कंवर तथा माताजी कंचन कंवर सहित परिवार के सदस्य मौजूद रहे। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं के प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।
प्रतिभा को मिली आर्थिक ताकत
कक्षा 12वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले लाल सिंह और निकिता को 3,100-3,100 रुपए तथा द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले सुनील मेघवाल और युवराज को 2,100-2,100 रुपए की नकद राशि प्रदान की गई।
कक्षा 10वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले संदीप सोनी और विजय लक्ष्मी को 3,100-3,100 रुपए तथा द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले कृष्णा कंवर और नंदा मीणा को 2,100-2,100 रुपए दिए गए।
वहीं कक्षा 8वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली पलक और फूल कंवर तथा तेजपाल और मंजू कंवर को 1,100-1,100 रुपए की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।
‘प्रतिभा को अवसर चाहिए, आर्थिक स्थिति नहीं रोकनी चाहिए’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयपाल सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा को सम्मानित करना ही इस पहल का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पुरस्कार राशि का मकसद विद्यार्थियों के बीच किसी तरह का ऊंच-नीच या भेदभाव पैदा करना नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि देवीसिंह जी चाहते तो अपने पिता की स्मृति में यह राशि किसी निजी संस्था को दान कर सकते थे, लेकिन उन्होंने सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली बच्चों को चुना। इसका कारण स्पष्ट है कि कई बच्चे प्रतिभाशाली होने के बावजूद आर्थिक परिस्थितियों के कारण अपने सपनों तक नहीं पहुंच पाते। प्रतिभा किसी की आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होनी चाहिए। जरूरत है तो केवल सही समय पर मिले प्रोत्साहन और अवसर की।
‘आज की राशि आपके भविष्य पर विश्वास है’
कोमल कंवर ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि उन्हें दी जा रही राशि केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि उनके भविष्य पर जताया गया विश्वास है। विद्यार्थियों को इस राशि को अपनी आगे की पढ़ाई और सपनों की दिशा में उपयोग करना चाहिए। उन्होंने पुरस्कार से वंचित रह गए विद्यार्थियों से भी निराश नहीं होने की अपील करते हुए कहा कि सफलता किसी एक परीक्षा या एक दिन से तय नहीं होती। लगातार मेहनत करने वाले विद्यार्थी निश्चित रूप से आगे बढ़ते हैं। आज की मेहनत ही कल की सफलता की नींव तैयार करती है।
पिता की याद में शुरू हुआ प्रोत्साहन का सिलसिला
देवीसिंह जी बीदावत की यह पहल सिर्फ एक समारोह तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने स्वर्गीय प्रेम सिंह बीदावत की स्मृति को गांव के बच्चों की उपलब्धियों से जोड़ दिया। परिवार ने स्मृति को सामाजिक जिम्मेदारी का रूप देते हुए उन बच्चों का हौसला बढ़ाया, जिनके लिए कुछ हजार रुपए की मदद भी पढ़ाई के सफर में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य गोपाल ने कार्यक्रम के अंत में बीदावत परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मिलने वाला ऐसा प्रोत्साहन उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने शिक्षा को व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाने का आह्वान किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित यह कार्यक्रम इस संदेश के साथ यादगार बना कि देश का भविष्य केवल बड़े शहरों के संसाधनों में नहीं, बल्कि गांव के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों में भी बसता है, जिन्हें आगे बढ़ने के लिए कभी-कभी सिर्फ एक छोटे से प्रोत्साहन की जरूरत होती है।

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