जयपुर। प्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में राजस्थान सरकार जल्द ही विशेष अभियान शुरू करेगी। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मादक पदार्थों के नियंत्रण और नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि नशामुक्ति के लिए सभी स्तरों पर जवाबदेही तय की जाए और मुख्य सचिव स्तर से तत्काल आवश्यक परिपत्र जारी किए जाएं। उन्होंने पूरे प्रदेश में एक माह तक विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
लोकभवन में आयोजित समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने कहा कि यदि किसी सरकारी विभाग में कोई कर्मचारी नशे में लिप्त पाया जाता है तो उसके विरुद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए। विश्वविद्यालयों में भी मादक पदार्थों के सेवन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी पर चिंता जताते हुए इसे रोकने के लिए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता बताई। राज्यपाल ने कहा कि जहां भी किसी गांव, कस्बे या तहसील में नशीले पदार्थ पकड़े जाएं, वहां संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संवाद कर उनकी जवाबदेही भी तय की जाए। उन्होंने पुलिस विभाग को बड़े होटलों और सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी बढ़ाने तथा नशामुक्ति अभियान को गंभीरता से संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस अधिकारियों से स्वयं भी नशे से दूर रहने और समाज में इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंता का विषय है और इसे केवल कानून से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों एवं जनजागरूकता के माध्यम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। स्कूलों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल देते हुए उन्होंने कहा, “नशा आग की तरह है, जो तेजी से फैलता है। इसे समय रहते रोकना जरूरी है।” बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया कि केंद्र सरकार की पहल पर नशामुक्त भारत अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा ने राज्य में चल रही कार्रवाई की जानकारी दी, जबकि पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने नशे की तस्करी और रोकथाम को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।





