पुलिस की वर्दी में दिखी संवेदना: किसी को मिला कानूनी सहारा, किसी को परिवार… 7,834 बुजुर्गों तक पहुंचा भरोसा

जयपुर। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन जब पुलिस बिना किसी शिकायत के किसी बुजुर्ग के घर केवल उसका हालचाल जानने पहुंचे, उसकी चिंताओं को सुने और सुरक्षा का भरोसा दिलाए, तो यह केवल ड्यूटी नहीं बल्कि संवेदनशील पुलिसिंग की मिसाल बन जाती है। राजस्थान पुलिस ने ‘महिला सुरक्षा संकल्प’ अभियान के तहत प्रदेशभर में 7,834 अकेली रह रही बुजुर्ग महिलाओं और बुजुर्ग दंपत्तियों के घर पहुंचकर यही संदेश दिया कि वे अकेले नहीं हैं, पुलिस हर समय उनके साथ खड़ी है।

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों और थाना स्तर की टीमों ने वरिष्ठ नागरिकों का कुशलक्षेम जाना, उनकी समस्याएं सुनीं, कानूनी अधिकारों की जानकारी दी और हेल्पलाइन 112, 1930 एवं 1090 सहित सुरक्षा संबंधी उपायों से भी अवगत कराया।

केस-1 : “अब मेरे मकान पर कोई कब्जा नहीं कर सकेगा” — उदयपुर की बुजुर्ग महिला

उदयपुर में अकेली रहने वाली एक बुजुर्ग महिला वर्षों से इस चिंता में जी रही थीं कि उनके बेटे के नहीं होने के कारण मृत्यु के बाद कहीं रिश्तेदार उनके मकान पर कब्जा न कर लें। अभियान के दौरान पुलिस अधीक्षक स्वयं उनके घर पहुंचे, उनकी पूरी बात सुनी और संपत्ति संबंधी कानूनी अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी।पुलिस के आश्वासन के बाद महिला भावुक हो गईं और कहा, “आज मुझे तसल्ली मिली है कि कोई मेरे मकान पर कब्जा नहीं कर सकेगा।” यह मुलाकात उनके लिए केवल कानूनी सलाह नहीं, बल्कि मानसिक संबल भी बन गई।

केस-2 : बिना शिकायत पहुंची पुलिस, बुजुर्ग दंपती बोले— “आज भरोसा और बढ़ गया”

उदयपुर में ही पुलिस टीम एक सेवानिवृत्त कर्नल और उनकी पत्नी के घर केवल उनका हालचाल जानने पहुंची। दोनों अकेले रहते हैं। बिना किसी शिकायत के पुलिस को अपने दरवाजे पर देखकर वे पहले आश्चर्यचकित हुए, फिर भावुक हो गए। दंपती ने कहा कि पुलिस का यह कदम औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज के वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशील सोच का परिचायक है। उन्होंने माना कि इस पहल से पुलिस के प्रति उनका विश्वास पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।

केस-3 : धौलपुर में पुलिस बनी परिवार जोड़ने का माध्यम

धौलपुर जिले के सरमथुरा थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद के कारण बुजुर्ग नथुआ राम मीना अपने परिवार से अलग रह रहे थे। अभियान के दौरान पुलिस ने केवल समस्या दर्ज नहीं की, बल्कि परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग कर दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराया। पुलिस के प्रयासों से पुत्र और परिजनों ने बुजुर्ग की देखभाल और सम्मान का भरोसा दिया। लंबे समय बाद परिवार के बीच लौटे नथुआ राम के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। यह मामला बताता है कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक रिश्तों को जोड़ने का माध्यम भी बन सकती है।

केस-4 : झालावाड़ में बना ‘वरिष्ठ नागरिक शिकायत रजिस्टर’, हर 15 दिन में हालचाल

झालावाड़ जिले में प्रत्येक थाने में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग शिकायत रजिस्टर तैयार किया गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित बीट अधिकारी हर 15 दिन में व्यक्तिगत मुलाकात या फोन के माध्यम से बुजुर्गों का हालचाल लेते हैं और शिकायत की प्रगति से अवगत कराते हैं। जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई भी की जाती है। इस व्यवस्था ने बुजुर्गों में सुरक्षा और सम्मान की भावना को मजबूत किया है।

प्रदेशभर में पहुंचा ‘सुरक्षा, सम्मान और विश्वास’ का संदेश

अभियान के दौरान करौली (960), जोधपुर पश्चिम (580), सवाई माधोपुर (493), अजमेर (458), बाड़मेर (320), बालोतरा (283), भीवाड़ी (244), खैरथल-तिजारा (217) सहित प्रदेश के सभी जिलों में पुलिस टीमों ने हजारों वरिष्ठ नागरिकों से सीधे संवाद किया। इस पहल को बुजुर्गों और उनके परिजनों ने पुलिस एवं समाज के बीच विश्वास मजबूत करने वाला सराहनीय कदम बताया।

डीजीपी बोले— पुलिस की जिम्मेदारी अपराध के बाद नहीं, उससे पहले भी

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राजस्थान पुलिस महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और विश्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर, अकेले और जरूरतमंद नागरिकों तक स्वयं पहुंचकर उन्हें सुरक्षा का भरोसा देना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी अभियान निरंतर जारी रहेंगे।

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